तुम्हारी मेरी कहानी

Posted on 26/09/2010

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Ok, so this is my first attempt at writing hindi in a long long time. So overlook any grammatical errors, assuming you get past how amateurish the poem is!

कठोर मतलबी दुनिया से कहीं दूर,
अपने मतलब की भूल भुलैया में,
भूल गए हैं मतलब की हेसियत.

खोकली ख़ुशी की खातिर,
कितनो और को कुचला हे,
फिर भी, आँख भर आती है,
उस एक पल की सचाई को देख.

अंग्रेजी में hypocrisy कहा करते हैं इसे,
पर इसी को  स्वीकार कर,
हम सच की तरफ कदम बड़ा रहे हैं.

एक अंदरूनी स्तिर्था की खोज में,
और चीजो की मेहेत्वपूर्नता को समझ ,
स्वयं के परिवर्तन में, स्वयं ही स्वयं  के गौरव को कुचल,
समाज की अल्पज्ञता के पार, सचाई को खोज रहे हैं हम.

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